जब तक ’मैं’ को खोजो नहीं - ’मैं’ मूल है और जब ’मैं’ को खोजोगे - ’मैं’ तूल है।
अपने में जो कुछ विशेसता दिखती है, वह प्रभु की दी हुई है | ऐसा दृढता पूर्वक मानने से अभिमान दूर हो सकता है|
मैं भगवान् का हूँ - इसको स्वीकार इसलिये करना है क्योंकि हमने अपने को