‘मेरे नाथ’-इस वाक्यका उच्चारण करते ही ऐसा हृदयमें भास होता है कि हम अनाथ नहीं हैं, कोई हमारा अपना है। और जो हमारा अपना है, वह कैसा है? वह समर्थ है और रक्षक है। अब आप सोचिये कि समर्थ और रक्षकके होते हुए हमारे और आपके जीवनमें चिन्ता और भयका कोई स्थान ही नही