भगवन ! कामना, वासना, लालसा, इच्छा, स्पृहा, अपेक्षा, अभिलाषा आदि सब केवल तुम्हारे मधुर-मंजुल चरणयुगलों की अनन्य प्रीतिमें ही नियुक्त रहे, किसी भी अन्य विषय की ओर कभी जायँ ही नहीं, या इनके लिए तुम्हारे मंगलमय चरण-युगलों को छोड़कर अन्य किसी वस्तु या स्थिति क