वाणी से उच्चारण करे तो केवल आनंद ही का, मन से मनन करे तो आनंद ही का और बुद्धि से विचार करे तो आनन्द ही का; परन्तु यदि ऐसी प्रतीति न हो तो कल्पित रूप से ही आनन्द का अनुभव करे | इसका भी फल बहुत अच्छा होता है | ऐसा करते-करते आगे चल कर नित्य आनन्द की प्राप्ति