भगवान्! जगत के सभी स्वरूपों में और सभी परिवर्तनों में निरंतर तुम्हारी लीलाके दर्शन हों | अनुकूलता और प्रतिकूलता जनित सुख-दुःख की कल्पना ही न उठे और लीला-दर्शन-जनित आनंद में ही नित्य मुग्ध बना रहूँ | सारे द्वंद्वों को तुम्हारी लीला आत्मसात कर ले | प्रसूति-